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बच्चों पर शायरी

बच्चों पर शायरी बच्चों पर कुछ शेर पेश है आशा है आप सभी को जरुर पसंद आयेंगे... इक मंज़र में पेड़ थे जिन पर चंद कबूतर बैठे थे इक बच्चे की लाश भी थी जिस के कंधे पर बस्ता था - अंजुम तराज़ी दुख़्तर-ए-रज़ ने उठा रक्खी है आफ़त सर पर ख़ैरियत गुज़री कि अ…

ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती

ग़ज़ल यानी दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती हमारे एक दोस्त का कहना है कि ग़ज़ल दूसरों की ज़मीन पर अपनी खेती है। बतौर शायर आप भले ही दावा करें कि आपने नई ज़मीन ईजाद की है मगर सच यही है कि आप दूसरों की ज़मीन पर ही शायरी की फ़सल उगाते हैं। कोई ऐसा क़ाफ़िया, र…

तेरे-मेरे दीन का मसअला नहीं, मसअला कोई और है - राजेश रेड्डी

तेरे-मेरे दीन का मसअला नहीं, मसअला कोई और है तेरे-मेरे दीन का मसअला नहीं, मसअला कोई और है न तेरा खुदा कोई और है न मेरा खुदा कोई और है मै जहा हूँ सिर्फ वही नहीं, मै जहा नहीं हूँ वहा भी हूँँ मुझे यूँ न मुझमे तलाश कर की मेरा पता कोई और है मेरे …

हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दिया - राजेश रेड्डी

हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दिया हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दिया हमने ही खुशियों को रंजोगम में ढल जाने दिया जीत बस एक वार की दुरी पे थी हमसे मगर दुश्मनों को हमने मैदान में संभल जाने दिया उम्र भर हम सोचते ही रह गए हर मोड़ पर फ़िस्लाकु…

जाने कितनी उड़ान बाकी हैं - राजेश रेड्डी

जाने कितनी उड़ान बाकी है जाने कितनी उड़ान बाकी है इस परिंदे में जान बाकी है जितनी बटनी थी,बट चुकी ये जमी अब तो बस आसमान बाकी है अब वो दुनिया अजीब लगती है जिसमे अम्न-ओ-अमन बाकी है इम्तिहाँ से गुजर के क्या देखा एक नया इम्तिहान बाकी है सर…

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं - राजेश रेड्डी

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं आप इन हाथो की चाहे तो तलाशी ले ले मेरे हाथो में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं हमने देखा है कई ऐसे खुदाओ को यहाँ सामने जि…

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