हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दिया
हाथ से हर एक मौके को निकल जाने दियाहमने ही खुशियों को रंजोगम में ढल जाने दिया
जीत बस एक वार की दुरी पे थी हमसे मगर
दुश्मनों को हमने मैदान में संभल जाने दिया
उम्र भर हम सोचते ही रह गए हर मोड़ पर
फ़िस्लाकुं सारे लम्हों को फिसल जाने दिया
तुम तो एक बदलाव लाने के लिए निकले थे, फिर
खुद को क्यूँ हालात के हाथो बदल जाने दिया
हम भी वाकिफ थे ख्यालो की हकीक़त से, मगर
हमने भी दिल को ख्यालो से बहल जाने दिया
रफ्ता-रफ्ता बिजलियों से दोस्ती सी हो गई
रफ्ता-रफ्ता आशियाना हमने जल जाने दिया
टालते है लोग तो सर से मुसीबत की घडी
हमने लेकिन कामयाबी को भी टल जाने दिया - राजेश रेड्डी
haath ko har ek mouke ko nikal jane diya
haath ko har ek mouke ko nikal jane diyahamne hi khushiyon ko ranz-o-gham me dhal jane diya
jeet bas ek waar ki duri par thi hamse magar
dushmano ko hamne maidan me sambhal jane diya
umra bhar ham sochte hi rah gaye har mod par
fislaakun sare lamho ko fisal jane diya
tum to ek badlav lane ke liye nikle the, phir
khud ko kyun halat ke hatho badal jane diya
ham bhi waqif the khyalo ki haqikat se, magar
hamne bhi dil ko khyalo se bahal jane diya
rafta-rafta bijliyon se dosti si ho gai
rafta-rafta aashiyana hamne jal jane diya
talte hai log to sar se musibat ki ghadi
hamne lekin kamyabi ko bhi tal jane diya - Rajesh Reddy
आपका ब्लॉग बहुत दिलकश है...आज पहली बार आना हुआ.
राजेश भाई की ये गज़ल बहुत खूबसूरत है...प्रस्तुतीकरण का शुक्रिया...
नीरज
नीरज जी धन्यवाद | आप लोगो का साथ बस यु ही बना रहे |
शायद पहली बार आपके व्लाग देखा है अच्छी गज़ल पढने को मिली ,बधाई