चराग़ डसती हुई आंधियां भी आएँगी - डॉ. राहत इंदौरी
चराग़ डसती हुई आंधियां भी आएँगी चराग़ डसती हुई आंधियां भी आएँगी अगर सफ़र है, तो दुश्वारियां भी आएँगी अभी तो नाव किनारे है फैसला न करो जरा बढ़ोगे तो गहराइयाँ भी आएँगी मैं मौसमों का थका हूँ, मुझे हकीर न जान मेरे शज़र में कभी पत्तियां भीं आएँगी मु…