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खुदा तो खैर मुस्लमा था

खुदा तो खैर मुस्लमा था आज़ादी के समय के आसपास लिखे गये तीन शेरो के बारे में पढते है जिनके बारे में मशहूर शायर निदा फाज़ली लिख रहे है और विश्लेषण कर रहे है | जगन्नाथ आज़ाद भारतीय साहित्य का जाना पहचाना नाम है| शायरी विरासत में मिली| उनके पिता डाक्…

मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा -पंडित हरिचंद अख्तर

मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा मिलेगी शेख को जन्नत हमें दौजख अता होगा बस इतनी बात है, जिसके लिए महशर बपा होगा रहे दोनों फ़रिश्ते साथ अब इन्साफ क्या होगा किसी ने कुछ लिखा होगा, किसी ने कुछ लिखा होगा बरोज़े-हश्र हाकिम कादरे मुतलक खुदा होग…

शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया - हरिचंद अख्तर

शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया शबाब आया किसी बुत पर फ़िदा होने का वक़्त आया मेरी दुनिया में बन्दे के खुदा होने का वक़्त आया उन्हें देखा तो जाहिद ने कहा, ईमान की यह है की अब इंसान की सिजदा रवा होने का वक़्त आया तकल्लुम की ख़ामोशी …

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