0
दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... Father's Day poetry

दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी...
मझधार में बनके रहे पतवार पिताजी...

साया भी उन्हीं से है, सहारा भी उन्हीं का...
बच्चों के लिए दर है और दीवार पिताजी...

चूल्हा ना पड़े ठंडा कभी, इसलिए अक्सर...
हंसकर गये हैं काम पर बीमार पिताजी...

माँ की बीमारी में बच्चे , रोटी और बरतन...
अक्सर निभाते माँ का भी किरदार पिताजी...

है दोस्त , अलार्म , गुरु, पाबंदीयाँ कभी...
थप्पड़ , नसीहतें कभी अखबार पिताजी... - सचिन शाश्वत

आलोक श्रीवास्तव की ग़ज़ल बाबूजी पढ़े

Roman

duniya ko batate rahe majhdaar pitaji...
majhdaar me banke rahe patwaar pitaji...

saya bhi unhi se hai, sahara bhi unhi ka
bachcho ke liey dar hai aur deewar pitaji...

chulha na pade thanda kabhi, isliye aksar...
haskar gaye hai kaam par beemar pitaji...

maa ki bimari me bachche, roti aur bartan...
aksar nibhate maa ka bhi kirdar pitaji...

hai dost, alarm, guru, pabandiya kabhi...
thappad, nasihate, kabhi akhbaar pitaji... - Sachin Shashvat
Father's Day Poetry, पितृ दिवस, पिता दिवस
loading...

Post a Comment

 
Top