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मरने के आसार दिखाई देते है - सचिन शाश्वत

मरने के आसार दिखाई देते है
चारो जानिब यार दिखाई देते है

जिनकी खातिर पहले हम इक सीढ़ी थे
उनको अब हम दीवार दिखाई देते है

कुछ है, चुन लेते है गुल बागीचो से
कुछ को तो बस खार दिखाई देते है

मेले लगते थे पहले त्यौहारों पर
अब तो बस बाज़ार दिखाई देते है

छिप जाते है भीड़ में हम जैसे चेहरे
ढूंढो तो दो-चार दिखाई देते है - सचिन शाश्वत

Roman

marne ke aasar dikhai dete hai
charo janib yaar dikhai dete hai

jinki khatir phale ham ik seedhi the
unko ab ham deewar dikhai dete hai

kuch hai, chun lete hai gul baagicho se
kuch ko to bas khaar dikhai dete hai

mele lagte the pahle tyoharo par
ab to bas baazar dikhai dete hai

chhip jate hai bhid me ham jaise chehre
dhundho to do-char dikhai dete hai - Sachin Shashvat


परिचय
सचिन शाश्वत जी रहने वाले मेरठ उत्तर प्रदेश के है | आप ग़ज़ल, गीत, कविता और मुक्तक विधा में लिखते है
आपसे निम्न मेल पर संपर्क किया जा सकता है kavisachinshashvat02@gmail.com
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