काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले - तुफ़ैल चर्तुवेदी

काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले रास्ता कोई किसी तरह वहाँ जा निकले लुत्फ़ लौटायेंगे अब सूखते होठों का उसे एक मुद्दत से तमन्ना थी वो प्यासा निकले

काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले

काश उससे मेरा फ़ुरकत का ही रिश्ता निकले
रास्ता कोई किसी तरह वहाँ जा निकले

लुत्फ़ लौटायेंगे अब सूखते होठों का उसे
एक मुद्दत से तमन्ना थी वो प्यासा निकले

फूल-सा था जो तेरा साथ, तेरे साथ गया
अब तो जब निकले कभी शाम को तन्हा निकले

हम फ़क़ीराना मिज़ाजों की न पूछो भाई
हमने सहरा में पुकारा है तो दरिया निकले

पहले इक घाव था अब सारा बदन छलनी है
ये शिफ़ा बख्शी, ये तुम कैसे मसीहा निकले

मत कुरेदो, न कुरेदो मेरी यादों का अलाव
क्या खबर फिर वो सुलगता हुआ लम्हा निकले

हमने रोका तो बहुत फिर भी यूँ निकले आँसू
जैसे पत्थर का जिगर चीर के झरना निकले - तुफ़ैल चर्तुवेदी


kash meri furqat ka hi rishta nikle

kash meri furqat ka hi rishta nikle
rasta koi kisi tarah wahan ka nikle

lutf lautayenge ab sukhte honto ka use
ek muddat se tamnna thi wo pyasa nikle

phool-sa tha jo tera saath, tere sath gaya
ab to jab nikle kabhi sahm ko tanha nikle

ham faqirana mizajo ki n puchho bhai
hamne sahra me pukara hai to dariya nikle

pahle ik ghaav tha ab sara badan chhalani hai
ye shifa bakhshi, ye tum kaise masiha nikle

mat kuredo, n kuredo meri yaado ka alaav
kya khabar phir wo sulgata hua lamha nikle

hamne roka to bahut phir bhi yun nikle aansu
jaise patthar ka jigar cheer ke jharna nikle - Tufail Chaturvedi

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