Showing posts from October, 2010

वो भले वादा करके मुकर जायेंगे - देवेन्द्र देव

वो भले वादा करके मुकर जायेंगे वो भले वादा करके मुकर जायेंगे पर हमें यकीं है, पुकारे तो ठहर जायेंगे है भले आज लबो पे उनके ना पर हमारे इश्क के कशीदे भी कभी असर लायेंगे भले फेर ले रुख अपना हमें देखकर पर एक दिन वो हमारे सायो से लिपटते नज़र आयें…

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे - मिर्ज़ा ग़ालिब

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे इक खेल है औरंग-ए-सुलैमाँ मिरे नज़दीक इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मिरे आगे जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मंज़ूर जुज़ वहम नहीं हस्ती-ए-अशिया …

Mirza Ghalib Serial All Parts

मिर्ज़ा ग़ालिब पर 1988 में राष्ट्रिय चेनल दूरदर्शन पर मिर्ज़ा ग़ालिब नाम से ही यह उनकी जीवनी का नाटी रूपांतर पेश किया गया | जिसके निर्माता शायर गुलज़ार (सम्पुरण सिंह कालरा ) थे और ग़ालिब की भूमिका नसरुद्दीन शाह ने निभाई थी | इस सीरीज में ग़ालिब की गज़ले भ…

अगर खिलाफ है होने दो, जान थोड़ी है - राहत इंदौरी

अगर खिलाफ है होने दो, जान थोड़ी है अगर खिलाफ है होने दो, जान थोड़ी है ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है लगेगी आग तो आयेंगे घर कई जद में यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है मुझे खबर है के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है …

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता - निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इस की वहाँ नहीं मिल…

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