0
Loading...


आप को देख कर देखता रह गया

यहाँ ग़ज़ल अज़ीज़ क़ैसी साहब की आपको देखकर देखता रह गया  ग़ज़ल की ज़मीन पर ही लिखी गई है

आप को देख कर देखता रह गया
क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया

आते आते मेरा नाम सा रह गया
उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया

वो मेरे सामने ही गया और मैं
रास्ते की तरह देखता रह गया

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ गये
और मैं था के सच बोलता रह गया

आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे
ये दिया कैसे जलता रह गया -वसीम बरेलवी

Roman

aap ko dekhkar dekhta rah gaya
kya kahu aur kahne ko kya rah gaya

aate aate mera naam sa rah gaya
uske hotho pe kuch kaNpta raha gaya

wo mere samne hi gaya aur mai
raste ki tarah dekhta rah gaya

jhuth wale kahi se kahi badh gaye
aur mai tha ke sach bolta rah gaya

aandhiyo ke irade to achhe na the
ye diya kaise jalta rah gaya - Waseem Barelavi
loading...

Post a Comment

 
Top