नहीं मुमकिन मिलन अब दोस्तो से - महावीर उत्तरांचली
नहीं मुमकिन मिलन अब दोस्तो से नहीं मुमकिन मिलन अब दोस्तो से मुहब्बत में बशर तनहा हुआ है करूँ क्या ज़िक्र मैं ख़ामोशियों का यहाँ तो वक़्त भी थम-सा गया है भले ही खूबसूरत है हक़ीक़त तसव्वुर का नशा लेकिन जुदा है अभी तक दूरियाँ हैं बीच अपने भल…