
जिधर आँख पड़ती है, तू रूबरू है
जिधर आँख पड़ती है, तू रूबरू हैतेरा जलवा सब में है सब जाय तू है
मेरी चश्म में क्या है? तेरा तसव्वुर
मेरे दिल में क्या है? तेरी आरजू है
बदन में महक है तेरे यासमन की
तेरे जुल्फे-मुशकि में अंबर की बू है
सादा पर्दा-ए-साज की यह नहीं है
कोई परदे में कर रहा गुफ्तगू है
कोई छूटता है यह दामन से कातिल
शहीदे-मुहब्बत का आखिर लहू है
'जफ़र' आपको ढूंढ़ मत ढूंढ़ उसको
वह तुझमे है, जिसकी तुझे जुस्तजू है - बहादुर शाह जफ़र
मायने
जाय = जगह, चश्म = आँख, तसव्वुर = कल्पना, यासमन = चमेली, जुल्फे-मुशकि = खुशबूदार जुल्फे, अंबर = खुशबू, पर्दा-ए-साज = साज का पर्दा, जुस्तजू = तलाश, खोज
jidhar aankh padti hai, tu rubru hai
jidhar aankh padti hai, tu rubru haitera jalwa sab me hai, sab jay tu hai
meri chashm me kya hai? tera taswwur
mere dil me kua hai? teri aarjoo hai
badan me mahak hai tere yasman ki
tere zulfe-mushki me ambar ki boo hai
sada parda-e-saaj ki yah nahi hai
koi parde me kar raha guftgu hai
koi chhutta hai yah daman se katil
shahide-muhbbat ka aakhir lahu hai
'zafar' aapko dhundh mat dhundh usko
wah tujhme hai, jiski tujhe justju hai - Bahadur Shah Zafar