बल्ली मारां की वो पेचीदा दलीलों की-सी गालियाँ
गुलज़ार साहब ग़ालिब के लिए लिखते है:बल्ली मारां की वो पेचीदा दलीलों की-सी गालियाँ
सामने ताल के नुक्कड़ पे बटेरो के कसीदे
गुदगुदाते हुई पान की वो दाद, वो वाह-वा
दरवाजे पे लटके हुए बोसिदो-से कुछ टाट के परदे
एक बकरी के मिमयाने की आवाज!
और धुंधलाई हुई शाम के बेनूर अँधेरे
ऐसे दीवारों से मुह जोड़ के चलते है यहाँ
चूडीवालान के कटड़े की बड़ी बी जैसे
अपनी बुझती हुई आँखों से दरवाजे टटोले
इसी बेनूर अँधेरी-सी गली कासिम से
एक तरतीब चिरागों की शुरू होती है
एक कुरआने सुखन का सफ़्हा खुलता है
असद उल्लाह खां 'ग़ालिब' का पता मिलता है - गुलजार
balli maraan ki wo pechida ki-si galiyaN
balli maraan ki wo pechida ki-si galiyaNsamne taal ke nukkad pe batero ke kaside
gudgudate hue paan ki wo daad, wo waah-waa
darwaje pe latke hue bosido-se kuch taat ke parde
ek bakri ke mimyane ki aawaj
aur dhundhlai hui shaam ke benur andhere
aise deewaro se muh jod ke chalte hai yahaa
chudiwalan ke katde ki badi bi jaise
apni bujhti hui aankho se darwaje tatole
isi benur andheri-si gali kasim se
ek tarteeb chirago ki shuru hoti hai
ek kuraane sukhan ka safha khulta hai
asad ullah khaan 'Ghalib' ka pata milta hai- Gulzar
" है और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे ...
कहते है कि ग़ालिब का है अंदाज़-ऐ-बयां और ! "
देवेन्द्र भाई, गुलज़ार साहब भी आपकी और हमारी तरह मिर्ज़ा ग़ालिब के मुरीद है !
शिवम जी आप सच कहते है, ग़ालिब जैसे इंसान सदियों में एक बार धरती पर आते है |
बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !
आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।
आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है - पधारें - पैसे का प्रलोभन ठुकराना भी सबके वश की बात नहीं है - इस हमले से कैसे बचें ?? - ब्लॉग 4 वार्ता - शिवम् मिश्रा
गालिब गालोब थे उन जैसा शायद ही कोई पैदा हो। धन्यवाद।
बहुत खूब ... गुलज़ार साहब की क्या बात है ..
रेख्ती के तुम्हीं उसताद नहीं हो ग़ालिब,
कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था!
इसे गुलज़ार साहब की आवाज़ में जितनी बार सुनो मन नहीं भरता...कमाल की कहन है...वाह...
नीरज
Neeraj ji agar aapke paas yah audio ya video ho to mujhe bhi bhejiye.
धारवाहिक मिर्ज़ा ग़ालिब के पहले एपिसोड़ में गुलज़ार सहाब ने इस नज़्म को बडी ही शाही अंदाज़ में पेश किया था| नादान उम्र में भी उस आवाज़ ने मेरे दिलों-दिमाग़ को पुरी तरह आपना काय़ल बना दिया| आज भी वह आवाज़, वह अल्फ़ाज़ मेरे कानोंमें गुंज रहे है|