कुछ शेर - मुनव्वर राना

कुछ शेर - मुनव्वर राना

कुछ शेर - मुनव्वर राना

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है
में उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कुराती है

लड़कपन में किए वादे कि कीमत कुछ नहीं होती
अंगूठी हाथ में रहती है मंगनी टूट जाती है

तो फिर जाकर कही माँ बाप को कुछ चैन पड़ता है
कि जब ससुराल से घर आ के बेटी मुस्कुराती है

उछलते खेलते बचपन में बेटा ढुढती होगी
तभी तो देखकर पोते को दादी मुस्कुराती है - मुनव्वर राना

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