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आपने अगर ग़ालिब के बारे में पढ़ा है तो यह जरूर सुना होगा कि  एक बार जौक के एक शेर कहने पर ग़ालिब उछल पड़े थे, लीजिए शेख इब्राहीम जौक़ का वही शेर पूरी ग़ज़ल के साथ पेश है:

अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायेंगे
मर गये पर न लगा जी तो किधर जायेंगे

सामने चश्मे-गुहरबार के, कह दो, दरिया
चढ के गर आये तो नज़रों से उतर जायेंगे

खाली ए चारागरो होंगे बहुत मरहमदान
पर मेरे जख्म नहीं ऐसे कि भर जायेंगे

पहुचेंगे रह्गुजरे-यार तलक हम क्योकर
पहले जब तक न दो-आलम से गुजर जायेंगे

आग दौज़ख कि भी हो आयेगी पानी-पानी
जब ये आसी अरके -शर्म से तर जायेंगे

हम नहीं वह जो करे खून का  दावा तुझ पर
बल्कि पूछेगा खुदा भी तो मुकर जायेंगे

रूखे-रौशन से नक़ाब अपने उलट देखो तुम
मेहरो-मह नज़रों से यारो के उतर जायेंगे

‘जौक’ जो मदरसे के बिगड़े हुए है मुल्ला
उनको मैखाने में ले आओ, संवर जायेंगे- शेख इब्राहीम जौक

मायने
चश्मे-गुहरबार=मोती बरसाने वाले नेत्र, चारागरो=इलाज करने वाले, दो-आलम=लोक-परीलोक, आसी=गुनाहगार, अर्के-शर्म=शर्म का पसीना, रूखे-रौशन=खूबसूरत चेहरा, मेहरो-मह=चाँद-सूरज

Roman

ab to ghabra ke ye kahte hai ki mar jayege
mar gaye par n laga ji to kidhar jayenge

samne chashme-guharbaar ke, kah do, dariya
chadh ke gar aaye to najro se utar jayenge

khali-e-charagaro honge bahut marhamdan
par mere jakhm nahi aise ki bhar jayenge

pahuchenge rahgujre yaar talak ham kyokar
pahle jab tak n do-aalam se gujar jayenge

aag doujakh ki bhi ho aayegi pani pani
jab ye aasi arke sharm se tar jayenge

ham nahi wah jo kare khun ka dava tujh par
balki puchega khuda bhi to mukar jayenge

rukhe roushan se naqab apne palat dekho tum
mehro-mah-najro se yaro ke uatar jayenge

zouq jo madrase ke bu\igde hue hai mulla
unko maikhane me le aao, sanwar jayenge - Shaikh ibrahim zouq

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  1. [...] जौक के मुह से यह शेर सुनकर वे उछल पड़े अब तो घबरा के ये कहते है कि मर जायेंगे ! मर के भी चैन न पाया तो [...]

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