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हो तअल्लुक़ तुझसे जब तक ज़िन्दगी बाक़ी रहे
दोस्ती बाक़ी नहीं तो दुश्मनी बाक़ी रहे

हो न जाऊँ मैं कहीं मग़रूर ए मेरे ख़ुदा
यूँ मुकम्मल कर मुझे के कुछ कमी बाक़ी रहे

सबके हिस्से में बराबर के उजाले आएँगे
घर के इन बूढ़े दियों में रोशनी बाक़ी रहे

ये तसव्वुर ख़ूबसूरत है मगर मुमकिन नहीं
चाँद भी छत पर रहे और धूप भी बाक़ी रहे

ख़ाक की पोशाक में हम मस्त हैं अहमद निसार
है यही सरमाया अपना बस यही बाक़ी रहे -अहमद निसार / Ahmad Nisar

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  1. क्या लिखे हैं शेर तूने खूब लिक्खे हैं निसार
    इस कलम कि जिंदगी भर ताजकी बाकी रहे

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  2. ये तसव्वुर ख़ूबसूरत है मगर मुमकिन नहीं
    चाँद भी छत पर रहे और धूप भी बाक़ी रह
    लाजवाब गज़ल पढवाने के लिये शुक्रिया।

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  3. @Purshottam Abbi 'Azer'Purshottam shahab wakai aapne jo nisar sahab ke liye jawab diya hai kabile tarif hai, khuda kare aap ki aur nisar sahab ki kalam taumra yuhi chalti rahe

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