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तुम जमाना-आशना, तुमसे जमाना ना-आशना
और हम अपने लिए भी अजनबी, ना-आशना

रास्ते भर कि रिफाक़त भी बहुत है जानेमन
वरना मंजिल पर पहुच कर कौन किसका आशना

मुद्दते गुजरी इसी बस्ती में लेकिन अब तलक
लोग नावाकिफ, फ़ज़ा बेगाना, हम ना-आशना

हम भरे शहरो में भी तन्हा है जाने किस तरह
लोग वीराने में भी पैदा कर लेते है आशना

अपनी बर्बादी पे कितने खुश थे हम लेकिन फ़राज़
दोस्त दुश्मन का निकल आया है अपना आशना- अहमद फ़राज़ / Ahmad Faraz

मायने 
आशना=जान-पहचान वाला, जमाना-आशना=ज़माने को समझाने वाले, मौका परस्त, रिफाक़त=साथ

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  1. बाल कवितायेँ
    बहुत ही खूबसूरती से ब्यान किया है
    एक बार इस मंच पर भी आयें
    www.forums.abhisays.com

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  2. किस नाम से हैं ?

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  3. @Sikandar khanji mere profile ka link hai http://www.forums.abhisays.com/member.php?u=1844 aur mai dgehlod ke naam se registered hu.

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