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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है बोले तो बातो से फुल झड़ते है
ये बात है तो चलो बात करके देखते है

सुना है उसके लबो से गुलाब जलते है
सो हम बहार पे इल्जाम धरके देखते है

सुना है उसके बदन कि तराश ऐसी है
कि फुल अपनी कबाए कुतर के देखते है

रुके तो गर्दिशे उसका तवाफ़ करती है
चले तो उसको ज़माने ठहर के देखते है

किसे नसीब कि बे पैराहन उसे देखे
कभी-कभी दरो दीवार घर के देखते है - अहमद फ़राज़ / Ahmad Faraz
मायने
कबाए=लिबास, तवाफ़=परिक्रमा, पैरहन=वस्त्र

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