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न रवा कहिये न सजा कहिये
कहिये कहिये मुझे बुरा कहिये
दिल में रखने कि बात है ग़म-ए-इश्क
इस को हरगिज़ न बरमला कहिये
वो मुझे क़त्ल कर के कहते है
मानता ही  न था ये क्या कहिये
आ गई आप को मसीहाई
मरने वालो को मरहबा कहिये
होश उड़ाने लगे रकीबो के
'दाग' को और बेवफा कहिये
                                   - दाग देहलवी

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  1. दाग साहब की क्या बात है...वाह...

    नीरज

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