1

हम उनसे अगर मिल बैठते है, क्या दोष हमारा होता है,
कुछ अपनी जसारत होती है, कुछ उनका इशारा होता है !

काटने लगी राते आँखों में, देख नहीं पलकों पर अक्सर,
याँ शामे-गरीबां का जुगनू या सुबह का तारा होता है !

हम दिल को लिए हर देश फिरे इस जींस के ग्राहक मिल न सके
ऐ बंजारे हम लोग चले, हमको तो खसारा होता है !

दफ्तर में उठे कैफे में गए, कुछ शेर कहे कुछ काफी पी,
पूछो जो मआश का इंशा जी यु अपना गुजरा होता है ! - इब्ने इंशा

मायने
जसारत=दिलेरी, खसारा=नुकसान, मआश= आजीविका
Roman

Hum unse agar mil baithte hai, kya dosh hamara hota hai,
kuch apni zasarat hoti hai, kuch unka ishara hota hai

katne lagi raate aankho me, dekha nahi palko par aksar

yaan sham-e-garibaan ka jugnu ya subah ka tara hota hai
ham dil ko liye har desh fire is jins ke grahak mil n sake

ae banzare hum log chale, hamko to khasara hota hai
daftar me uthe kaife me gaye, kuch sher kahe kuch kafi pi
puchho to maash ka insha ji yun apna gujara hota hai - Ibne Insha

Post a Comment Blogger

  1. 'कल चौदवी की रात थी' ग़ज़ल भी शायद इन्होनें ही लिखी है ? ये वाली भी अच्छी है .... अच्छा संकलन, हो सके तो कुछ कविताएँ भी जोड़े..

    ReplyDelete

 
Top