आदमी के लिए है क्या औरत - बलजीत सिंह बेनाम

आदमी के लिए है क्या औरत

आदमी के लिए है क्या औरत
माँ बहन और प्रेमिका औरत

वो ही सीता वही अहिल्या भी
फिर क्यों सदियों से बेवफ़ा औरत

लौट कर कब है आ सकी इज्ज़त
घर की दहलीज़ से न जा औरत

ज़िन्दगानी बनी किसी के लिए
तो किसी के लिए क़ज़ा औरत

आदमी और इक फ़रिश्ते के
दरमियाँ कोई आईना औरत - बलजीत सिंह बेनाम
मायने
क़ज़ा = मृत्यु


aadmi ke liye ho kya aurat

aadmi ke liye hai kya aurat
maa bahan aur premika aurat

wohi seeta wahi ahilya bhi
phir kyo sadiyon se bewafa aurat

lout kar kab hai aa saki ijjat
ghar ki dahleej se n jaa aurat

zindgani bani kisi ke liye
to kisi ke liye kaza aurat

aadmi aur ik farishte ke
darmiyan koi aaina aurat - Baljeet Singh Benaam
बलजीत सिंह बेनाम
सम्प्रति:संगीत अध्यापक, उपलब्धियाँ:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित, विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी हिसार और रोहतक से काव्य पाठ
सम्पर्क सूत्र:103/19 पुरानी कचहरी कॉलोनी, हाँसी:125033
मोबाईल: 9996266210
Mail : baljeets312@gmail.com

Post a Comment

कृपया स्पेम न करे |

Previous Post Next Post

Advertisement

preload preload preload preload preload