लगाए बहुत साल याँ आते आते - बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

लगाए बहुत साल याँ आते आते

लगाए बहुत साल याँ आते आते,
रुला ही दिया क़द्र-दाँ आते आते।

बहुत थक गए हम राह-ए-ज़िन्दगी में,
थकीं पर न दुश्वारियाँ आते आते।

घुटी साँस ज्यूँ ही गली आई उनकी,
न मर जाएँ उनका मकाँ आते आते।

करें याद गर वो ज़रा भी नहीं ग़म,
निकल जाए दम हिचकियाँ आते आते।

बड़ी गर्मजोशी से दावत सजी थी,
हुआ ठंडा सब मेज़बाँ आते आते।

बताऐँ तुझे क्या ए ख्वाबों की मंज़िल,
कहाँ पहुँचे थे हम यहाँ आते आते।

'नमन' क्या बचा जो करें फ़िक्र उसकी,
लुटा कारवाँ पासबाँ आते आते। - बासुदेव अग्रवाल 'नमन'


परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
नाम- बासुदेव अग्रवाल
शिक्षा - B. Com.
जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952
निवास स्थान - तिनसुकिया (असम)
रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ।
परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। Whats app के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं।
सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं।

lagaye bahut saal yaaN aate aate

lagaye bahut saal yaaN aate aate
rula hi diya kadr-daaN aate aate

bahut thak gaye ham raah-e-zindagi me
thaki par na dushvariyan aate aate

ghuti saans jyu hi gali aai unki
n mar jaye unka makaaN aate aate

kare yaad gar wo zara bhi nahi gham
nikal jaye dam hichkiyaN aate aate

badi garmjoshi se dawat sahi thi
hua thanda sab mezbaaN aate aate

bataye tujhe kya e khwabo ki manzil
kahan pahuche the ham yahaN aate aate

'Naman' kya bacha jo kare fikr uski
luta karwaan pasbaan aate aate - Basudeo Agarwal Naman

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