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एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा
एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा

यगाना चंगेजी ( आस अज़ीमाबादी ) सिर्फ एक नाम नहीं, एक शायर ही नहीं, एक शोला थे, एक तहलका थे | 17 अक्टूबर 1884 को अजीमाबाद (पटना) में जन्मे मश...

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घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान
घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान

पढ़ने में मज़ा तो है आता इन छाओं में, घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में पहली अशुद्धि सच लिखना, है दूसरी इनका ना बिकना, चोर ना छिप ...

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तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे - राजेंद्र नाथ रहबर
तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे - राजेंद्र नाथ रहबर

तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे प्यार में डूबे हुए खत मैं जलाता कैसे तेरे हाथों के लिखे खत मैं जलाता कैसे जिनको दुनिया की निगाहों स...

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कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची - अबु तालिब
कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची - अबु तालिब

कभी आँसू कभी ख़ुशी बेची हम ग़रीबों ने बेकसी बेची चन्द साँसे ख़रीदने के लिये रोज़ थोड़ी सी ज़िन्दगी बेची जब रुलाने लगे मुझे साये मैंने उकता ...

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वोट देने से पहले तुम इस बार - शहीद अंजुम
वोट देने से पहले तुम इस बार - शहीद अंजुम

वोट देने से पहले तुम इस बार, अपने माँ बाप की दुआ लेना, अपने बच्चों से गुफ्तगू करना, अपनी बीवी के दिल की भी सुनना, कुछ बदलने की जुस्...

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माँ पर लिखे कुछ शेर
माँ पर लिखे कुछ शेर

जीवन की शुरुवात में जो हमसे जुडी रहती है वो है माँ | माँ पर लिखने जाये तो कई किताबे भर जायेगी फिर भी लिखने को काफी कुछ बाकी रह जायेगा |  आप...

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माँ पर लिखे मुनव्वर राना के कुछ शेर
माँ पर लिखे मुनव्वर राना के कुछ शेर

माँ पर लिखे मुनव्वर राना के कुछ शेर चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैंने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है *-*-*-* हाल...

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मजदूर पर कहे गए शेर
मजदूर पर कहे गए शेर

मजदूर दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाए | मजदूर और मजदूरी पर शायरों ने काफी कुछ कहा है हमने उनमे से कुछ एकत्रित किये है हो सकता है इनमे से...

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सांस लों या खुश रहो - जोश मलीहाबादी
सांस लों या खुश रहो - जोश मलीहाबादी

कसम उस मौत की, उठती जवानी में जो आती है उरूसे-नौ को बेवा, माँ को दीवाना बनाती है जहा के झुटपुटे के वक्त एक ताबूत निकला हो कसम उस शब की ...

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वफ़ा पर कहे गए शेर
वफ़ा पर कहे गए शेर

दोस्तों आप सभी के लिए पेश है वो शेर जिनमे वफ़ा का ज़िक्र है  या यूँ कहे वफ़ा पर कहे गए शेर इश्क करना, नहीं आसान, बहुत मुश्किल है छाती पत्थर...

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तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा - आलोक श्रीवास्तव
तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा - आलोक श्रीवास्तव

तू जब राह से भटकेगा, मै बोलूँगा मुझको कुछ भी खटकेगा, मै बोलूँगा सच का लहजा थोडा टेढा होता है जहाँ जहाँ तू अटकेगा, मै बोलूँगा अवसरव...

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दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई - गुलज़ार
दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई - गुलज़ार

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसान उतारता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पक गया है शज़र पे फल शायद फ...

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मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी - हबीब तनवीर
मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी - हबीब तनवीर

मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी देखनी है आब-जू-ए-ज़ीस्त की रफ़्तार अभी कर चुका हूँ पार ये दरिया न जाने कितनी बार पार ये दरिया ...

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मंजिले क्या है रास्ता क्या है - आलोक श्रीवास्तव
मंजिले क्या है रास्ता क्या है - आलोक श्रीवास्तव

मंजिले क्या है रास्ता क्या है हौसला हो तो फासला क्या है वो सजा देके दूर जा बैठा किस्से पुछू मेरी खता क्या है जब भी चाहेगा छीन लेगा वो...

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ना मै सोना, ना मै मोती, ना मै कोहेनूर हूँ - अबरार दानिश
ना मै सोना, ना मै मोती, ना मै कोहेनूर हूँ - अबरार दानिश

ना मै सोना, ना मै मोती, ना मै कोहेनूर हूँ कौन थामे हाथ मेरा, मै तो इक मजदूर हूँ बस गया है जेहन-ओ-दिल में यूँ मिरे तेरा गुरूर देखने व...

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जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है - अंजुम रहबर
जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है - अंजुम रहबर

जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है उन का हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है चाँद तारे मिरे क़दमों में बिछे जाते हैं ये बुज़ुर्गों की दुआओ...

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किनारे को भी हमसे किनारा चाहिए - चिन्मय शर्मा
किनारे को भी हमसे किनारा चाहिए - चिन्मय शर्मा

किनारे को भी हमसे किनारा चाहिए, साथ कहाँ अब उसको हमारा चाहिए। कश्ती में तुम्हारी ख्वाहिशें आती नहीं, तुम्हें किसी सफ़ीने का सहारा चाहिए।...

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मरने के आसार दिखाई देते है - सचिन शाश्वत
मरने के आसार दिखाई देते है - सचिन शाश्वत

मरने के आसार दिखाई देते है चारो जानिब यार दिखाई देते है जिनकी खातिर पहले हम इक सीढ़ी थे उनको अब हम दीवार दिखाई देते है कुछ है, चुन ...

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मुसाफिर हूँ इक अनजानी डगर का - कृष्ण कुमार नाज़
मुसाफिर हूँ इक अनजानी डगर का - कृष्ण कुमार नाज़

मुसाफिर हूँ इक अनजानी डगर का कुछ अंदाजा नहीं होता सफर का मेरे ख्वाबो मेरी नींदे सजा दो कि मै जागा हुआ हूँ उम्र भर का है मुझमे खामि...

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मेरा किरदार कब से जंच रहा है - राज़िक़ अंसारी
मेरा किरदार कब से जंच रहा है - राज़िक़ अंसारी

मेरा किरदार कब से जंच रहा है मगर जो सच है वो तो सच रहा है इज़ाफ़ा हो रहा है नफ़रतों में न जाने कौन साज़िश रच रहा है सफ़ेदी आ गयी बालो...

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मेरी दुनिया के तमाम बच्चे - अदनान कफील दरवेश
मेरी दुनिया के तमाम बच्चे - अदनान कफील दरवेश

वो जमा होंगे एक दिन और खेलेंगे एक साथ मिलकर वो साफ़-सुथरी दीवारों पर पेंसिल की नोक रगड़ेंगे वो कुत्तों से बतियाएँगे और बकरियों से औ...

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ये किसका लहू है कौन मरा - साहिर लुधियानवी
ये किसका लहू है कौन मरा - साहिर लुधियानवी

ये किसका लहू है कौन मरा ऐ रहबर-ए-मुल्क-ओ-कौम बता ये किसका लहू है कौन मरा ये जलते हुए घर किसके हैं ये कटते हुए तन किसके है, तकसीम क...

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लूट मची है चारों ओर... सारे चोर - राहत इंदौरी
लूट मची है चारों ओर... सारे चोर - राहत इंदौरी

लूट मची है चारों ओर... सारे चोर इक जंगल और लाखों मोर... सारे चोर इक थैली में अफसर भी, चपरासी भी क्या ताकतवर, क्या कमजोर... सारे चोर उ...

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माना किसी ज़ालिम की हिमायत नहीं करते -  आसिम वास्ती
माना किसी ज़ालिम की हिमायत नहीं करते - आसिम वास्ती

माना किसी ज़ालिम की हिमायत नहीं करते ये लोग मगर खुल के बग़ावत नहीं करते करते हैं मुसलसल मिरे ईमान पे तन्क़ीद ख़ुद अपने अक़ीदों की वज...

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शिकार को निकला शेर - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
शिकार को निकला शेर - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब-के-सब यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्साे लिया जाएगा...

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देश गान - हामिद अल्लाह "अफसर" मेरठी
देश गान - हामिद अल्लाह "अफसर" मेरठी

भारत प्यारा, देश हमारा, सब देशो से न्यारा है, हर रूत, हर एक मौसम इस का, कैसा प्यारा-प्यारा है, कैसा सुहाना, कैसा सुन्दर, प्यारा देश हमारा...

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सआदत हसन मंटो जीवन परिचय
सआदत हसन मंटो जीवन परिचय

सआदत हसन मंटो साहब का जन्म 11 मई 1912 को समराला (पंजाब) में हुआ था | आपने भारत पकिस्तान के विभाजन को अपनी आँखों से देखा सो इस दर्द को अ...

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