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इससे पहले रात मेरे घर छापा मारे - गुलज़ार
इससे पहले रात मेरे घर छापा मारे - गुलज़ार

इससे पहले रात मेरे घर छापा मारे मै तन्हाई ताले में बंद कर आता हूँ "गरबा" नाचता हूँ फिर घुमती सडको पर | -गुलज़ार Roman ...

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जश्न-ए-आज़ादी पर कुछ शेर
जश्न-ए-आज़ादी पर कुछ शेर

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलिस्ताँ हमारा ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में समझो वहीं ह...

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परवेज़ मुजफ्फर साहब के आज़ादी पर कुछ शेर
परवेज़ मुजफ्फर साहब के आज़ादी पर कुछ शेर

आप सभी दोस्तों को जश्न-ए-आज़ादी की बहुत बहुत मुबारकबाद आज आप सभी के लिए परवेज़ मुजफ्फर साहब के कुछ शेर प्रस्तुत है आप फ़िलहाल यूके में रह रहे ...

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कर रहा है यही इल्तिजा आईना - क़मर एजाज़
कर रहा है यही इल्तिजा आईना - क़मर एजाज़

पत्थरों का नगर है बचा आईना कर रहा है यही इल्तिजा आईना देखकर लोग तुझको संवरने लगे अपने क़िरदार को तू बना आईना घर के आईने की क़द्र घ...

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सबकी देखो यही कहानी - जियाउर रहमान जाफ़री
सबकी देखो यही कहानी - जियाउर रहमान जाफ़री

सबकी देखो यही कहानी सब कहते हैं पानी -पानी है ये तो बरसात का मौसम बारिश वाली रात का मौसम माना बिजली चमक रही है बूंद एक न टपक...

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उसको पाने का जतन भी देखिए - बलजीत सिंह बेनाम
उसको पाने का जतन भी देखिए - बलजीत सिंह बेनाम

उसको पाने का जतन भी देखिए और खोने की चुभन भी देखिए गोरा मुखड़ा है लटों में छुप गया रात से दिन का मिलन भी देखिए ज़िन्दगी भर ख़्वाहिशों के ...

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जुलूस - मुंशी प्रेमचंद
जुलूस - मुंशी प्रेमचंद

1 पूर्ण स्वराज्य का जुलूस निकल रहा था। कुछ युवक, कुछ बूढ़े, कुछ बालक झंडियाँ और झंडे लिये वंदेमातरम् गाते हुए माल के सामने से निकले। द...

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मुसलसल बेकली दिल को रही है  - नासिर काज़मी
मुसलसल बेकली दिल को रही है - नासिर काज़मी

मुसलसल बेकली दिल को रही है मगर जीने की सूरत तो रही है मैं क्यूँ फिरता हूँ तन्हा मारा-मारा ये बस्ती चैन से क्यों सो रही है चल दिल स...

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बेसबब कोई गिरफ्तार भी हो सकता है - नूर मुनीरी
बेसबब कोई गिरफ्तार भी हो सकता है - नूर मुनीरी

बेसबब कोई गिरफ़्तार भी हो सकता है ये तमाशा सर-ए-बाज़ार भी हो सकता है पूछना ज़ुर्म नहीं, इसलिए पूछा कीजे सामने वाला समझदार भी हो सकता...

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इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे -वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे -वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

इस दास्ताँ को फिर से नया कोई मोड़ दे टूटा हुआ हूँ पहले से कुछ और तोड़ दे अब देके ज़ख्म मेरे सितमगर खड़ा है क्यों मिर्ची भुरक दे ज़ख्म पे नी...

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लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो - वजीर आगा
लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो - वजीर आगा

लाजिम कहाँ कि सारा जहाँ खुश लिबास हो मैला बदन पहन के न इतना उदास हो इतना न पास आ कि तुझे ढूंढते फिरें, इतना न दूर जा कि हम:वक्त पास हो ...

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Alif Laila - 4 किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का
Alif Laila - 4 किस्सा बूढ़े और उसकी हिरनी का

पिछले भाग भाग - १ शहरयार और शाहजमाँ की कहानी भाग - २ किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का भाग - ३ किस्सा व्यापारी और दैत्य का   किस्सा बूढ़े और ...

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कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल - मुजफ्फर हनफ़ी
कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल - मुजफ्फर हनफ़ी

कान बजते हैं कि फिर टूट के बरसे बादल  । आंख जब सूख रही थी तो कहां थे बादल । तीर बरसे जो नज़र कौसे-कुज़ह पर की है । आग टपकी हे जहां हम न...

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आपकी याद आती रही रात भर - पुरूषोत्तम अब्बी "आज़र"
आपकी याद आती रही रात भर - पुरूषोत्तम अब्बी "आज़र"

पुरुषोत्तम अब्बी आज़र साहब की यह ग़ज़ल मखदूम मोहिउद्दीन साहब की "  आपकी याद आती रही " ग़ज़ल की बहर पर लिखी गई है इस बहर पर फैज़ ने भी ...

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Alif laila -3 किस्सा व्यापारी और दैत्य का
Alif laila -3 किस्सा व्यापारी और दैत्य का

अलिफ़ लैला भाग - २ ( पिछला भाग ) किस्सा व्यापारी और दैत्य का शहरजाद ने कहा : प्राचीन काल में एक अत्यंत धनी व्यापारी बहुत-सी वस्त...

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बारिश आई चलो नहाए - यशु जान
बारिश आई चलो नहाए - यशु जान

बारिश आई चलो नहाए, इस बारिश में धूम मचाएं, काले बादल घनघोर घटाएँ, बारिश आई चलो नहाएं | अपने सखी सखा संग खेल, हम आनंद उठाएंग...

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हीरा जनम अनमोल था, कौड़ी बदले जाये  | कबीर जयंती पर विशेष लेख - प्रदीप कुमार सिंह
हीरा जनम अनमोल था, कौड़ी बदले जाये | कबीर जयंती पर विशेष लेख - प्रदीप कुमार सिंह

कबीर जयंती पर श्री प्रदीप कुमार सिंह का विशेष लेख आप सभी के लिए | आज समाज, देश और विश्व के देशों में बढ़ती हुई भुखमरी, अशिक्षा, बेरोज...

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दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... - सचिन शाश्वत
दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... - सचिन शाश्वत

दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी... मझधार में बनके रहे पतवार पिताजी... साया भी उन्हीं से है, सहारा भी उन्हीं का... बच्चों के लिए दर ...

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एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा
एक ऐसा शायर जो ताउम्र आग से खेलता रहा

यगाना चंगेजी ( आस अज़ीमाबादी ) सिर्फ एक नाम नहीं, एक शायर ही नहीं, एक शोला थे, एक तहलका थे | 17 अक्टूबर 1884 को अजीमाबाद (पटना) में जन्मे मश...

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घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान
घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में - यशु जान

पढ़ने में मज़ा तो है आता इन छाओं में, घनघोर अशुद्धियां हैं तेरी कविताओं में पहली अशुद्धि सच लिखना, है दूसरी इनका ना बिकना, चोर ना छिप ...

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