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तुम्हारे रास्तो से दूर रहना
कहा तक ठीक है मजबूर रहना

सभी के बस की बात थोड़ी है
नशे में इस कदर भी चुर रहना

ना जाने किस कदम में छोड़ेगी
हमारे साथ होके दूर रहना

तुम्हारी याद ही तो जानती है
मेरे कमरे में बन के नूर रहना

सच तो ये है मेरी तमन्ना थी
तुम्हारी मांग का सिंदूर रहना

जो मेरे पास आना चाहती है
वो ही कहती है मुझसे दूर रहना

तो क्या ये ठीक है मेरे दिल में
तुम्हारा बन के यूँ नासूर रहना

मुझसे पूछो इतने पत्थरों में
कितना मुश्किल है कोहिनूर रहना

उसकी आदत मै आ गया है अब
हमारे नाम से मशहूर रहना

मैंने तो सिर्फ इतना जाना है
बड़ा मुश्किल है तुझसे दूर रहना

कभी इस्सा कभी सुकरात बनना
कभी सरमद कभी मंसूर रहना

ये शायरी नहीं तज्जली है
ज़ेहन ऐसे ही कोहेतूर रहना

सतलज हम तुझे पहचानते है
तुझे हक है युही मगरूर रहना - सतलज राहत

Roman

Tumhare rasto se dur rahna
kaha tak thik hai majboor rahna

sabhi k bus ki baat thodi hai
nashe me is kadar bhi chur rahna

na jane kis kadam pe chhodegi
humare sath hoke door rahna

tumhari yaad hi to janti hai
mere kamre me ban k noor rahna

sach to ye hai meri tammana thi
tumhari mang ka sindoor rahna

jo mere paas aana chahti hai
wo hi kahti hai mujhse dur rahna

to kya ye thik hai mere dil me
tumhara ban k yu nasoor rahna

mujhse pucho itne patthero me
kitna mushkil hai kohi-nur rahna

uski aadat me aa gaya hai ab
humare naam se mashhoor rahna

maine to sirf itna jana hai
bada mushkil hai tujhse door rahna

kabhi Issa kabhi Sukrat banna
kabhi Sarmad kabhi Mansur rahna

ye shairi nahi tajjali hai
zehan aaise hi kohetoor rahna

'satlaj' hum tujhe pahchante hain
tujhe haq hai ! yuhi magrur rahna - Satlaj Raahat
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