आ गई उसकी नानी है
रीता को परेशानी हैआ गई उसकी नानी है
नानी उसे हिदायत देगी
नहीं ज़रा सी राहत देगी
बोलेंगी वो ये मत खाओ
नहीं धूप में बाहर जाओ
शाम में घर वापस आ जाना
वक्त से आके खाना खाना
सर्दी में ये खेलना कैसा
फीवर है तो झेलना कैसा
चलो दवाई ला देती हूँ
इंजेक्शन लगवा देती हूँ
चलो ये कपड़े अभी उतारो
खुले बाल हैं इसे संवारो
नानी जब भी घर आती है
आफत ही इक ला जाती है -डा जियाउर रहमान जाफरी
बच्चो पर और अशआर यहाँ पढ़िए
परिचयडॉ. जिया उर रहमान जाफरी साहब ने हिन्दी से पी एचडी और एम॰ एड किया है | आप मुख्यतः ग़ज़ल विधा में लिखते है | आप हिन्दी उर्दू और मैथिली की राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में नियमित लेखन करते आ रहे है | आपको बिहार आपदा विभाग और बिहार राजभाषा विभाग से पुरुस्कृत किया जा चूका है |
आपकी मुख्य प्रकाशित कृतियों में खुले दरीचे की खुशबू (हिन्दी ग़ज़ल), खुशबू छू कर आई है (हिन्दी ग़ज़ल) , चाँद हमारी मुट्ठी में है (बाल कविता), परवीन शाकिर की शायरी (आलोचना), लड़की तब हँसती है (सम्पादन) शामिल है |
फ़िलहाल आप बिहार सरकार में अध्यापन कार्य कर रहे है |
aa gayi uski nani hai
rita ko pareshani haiaa gayi uski nani hai
nani use hidayat degi
nahi zara si raahat degi
bolegi wo ye mat khao
nahi dhoop me bahar jao
sham me ghar wapas aa jana
waqt se aake khana khana
sardi me ye khelna kaisa
fever hai to jhelna kaisa
chalo dawai la deti hun
injection lagwa deti hun
chalo ye kapde abhi utaro
khule baal hai ise sanwaro
nani jab bhi ghar aati hai
aafat hi ek laa jati hai - Dr. Ziaur Rahman Zafri

बहुत ही बेहतरीन लेख ..... सादर धन्यवाद व आभार। :) :)