दरिया ने कल जो चुप का लिबादा पहन लिया - बेदिल हैदरी

दरिया ने कल जो चुप का लिबादा पहन लिया

दरिया ने कल जो चुप का लिबादा पहन लिया
प्यासों ने अपने जिस्म पे सहरा पहन लिया

वो टाट की क़बा थी कि काग़ज़ का पैरहन
जैसा भी मिल गया हमें वैसा पहन लिया

फ़ाक़ों से तंग आए तो पोशाक बेच दी
उर्यां हुए तो शब का अंधेरा पहन लिया

गर्मी लगी तो ख़ुद से अलग हो के सो गए
सर्दी लगी तो ख़ुद को दोबारा पहन लिया

भौंचाल में कफ़न की ज़रूरत नहीं पड़ी
हर लाश ने मकान का मलबा पहन लिया

'बे-दिल' लिबास-ए-ज़ीस्त बड़ा दीदा-ज़ेब था
और हम ने इस लिबास को उल्टा पहन लिया - बेदिल हैदरी


dariya ne kal jo chup ka libaada pahan liya

dariya ne kal jo chup ka libaada pahan liya
pyason ne apne jism pe sahra pahan liya

wo tat ki qaba thi ki kaghaz ka pairahan
jaisa bhi mil gaya hamein waisa pahan liya

faqon se tang aae to poshak bech di
uryan hue to shab ka andhera pahan liya

garmi lagi to khud se alag ho ke so gae
sardi lagi to khud ko dobara pahan liya

bhaunchaal mein kafan ki zarurat nahin padi
har lash ne makan ka malba pahan liya

'be-dil' libas-e-zist bada dida-zeb tha
aur hum ne is libas ko ulta pahan liya - Bedil Haidari

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