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आज ही के दिन 24 जुलाई 1991 को ठीक 24 साल पहले शायर कैफ भोपाली साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए और अपनी यादो उनके मुरीदो के लिए छोड़ गए उनकी एक मशहूर ग़ज़ल आप सबके लिए पेश है
उसका अंदाज है अभी तक लड़कपन वाला
मीठा लगता है उसे नीम वो आँगन वाला

अब भी मेरे लिए चिलमन से निकल आता है
सावला फूल सा इक हाथ वो कंगन वाला

बिजलियाँ आँखों की जुल्फों की घटाए लेकर
तुम चले आओ तो मौसम रहे सावन वाला

ताके बिछड़े तो बिछड़ने का कुछ अहसास न हो
हम से रक्खो तौर तरीका कोई दुश्मन वाला- कैफ भोपाली

Roman

uska andaaz hai abhi tak ladakpan wala
metha lagta hai use neem wo aangan wala

ab bhi mere liye chilman se nikal aata hai
sawla phool sa ik haath wo kangan wala

bijliya aankho ki zulfo ki ghataye lekar
tum chale aao to mousam rahe sawan wala

taake bichhde to bichhdane ka kuch ahsaas n ho
ham se rakkho tour tarika koi dushman wala - Kaif Bhopali
#jakhira

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  1. कैफ भोपाली जी को सादर श्रद्धासुमन!

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