0
तेरी तरफ से हमला होगा ऐसा हमने कब सोचा था
शर्बत इतना कड़वा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

आप तो पिछले कई बरस से मिनरल वाटर पीते है
आपका दिल भी गन्दा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

छोटी-सी इक बात पे उसने सात समंदर पार किये
उसकी गोद में बच्चा होगा ऐसा हमने कब सोचा था

हम जैसे बज़र्फ़ की कीमत इस बस्ती में कोई नहीं
सोना इतना सस्ता होगा ऐसा हमने कब सोचा था

जिसकी खातिर सारी दुनिया यारो छोड़ के आये है
वह भी इंसा गूंगा होगा ऐसा हमने कब सोचा था - हसीब सोज़

Roman

teri taraf se hamla hoga aisa hamne kab socha tha
sharbat itna kadwa hoga aisa hamne kab socha tha

aap to pichle kai baras se minral watar pete hai
aapka dil bhi ganda hoga aisa hamne kab socha tha

chhoti-si ik baat pe usne saat samndar paar kiye
uski god me bachcha hoga aisa hamne kab socha tha

ham kaise bzarf ki keemat is basti me koi nahi
sona itna sasta hoga aisa hamne kab socha tha

jiski khatir sari duniya yaaro chhod ke aaye hai
wah bhi insa gunga hoga aisa hamne kab socha tha - Haseeb Soz
#jakhira

Post a Comment Blogger

 
Top