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कैफ भोपाली साहब का 20 फ़रवरी को जन्म दिवस आता है इस अवसर पर उनकी एक ग़ज़ल पेश है
शायद किसी काबिल ये मिरा सर भी नहीं है
किस्मत में तिरे पाँव कि ठोकर भी नहीं है

माँ कहती है मर जाऊं तो लाएगा कफ़न कौन
या रब! मिरा बेटा अभी नौकर भी नहीं है

तन्हाई में वो भी कभी रो लेते तो होंगे
दिल उनका नहीं फूल तो पत्थर भी नहीं है

क्यों चाँद को कहते है ये शायर तिरा चेहरा
ये तो तिरे तलवों के बराबर भी नहीं है कैफ भोपाली
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Roman

shayad kisi kabil ye mira sir bhi nahi hai
kismat me tire paanv ki thokar bhi nahi hai

maa kahti hai mar jaaun to layega kafan koun
yaa rab! mira beta abhi noukar bhi nahi hai

tanhai me wo bhi kabhi ro lete to honge
dil unka nahi phool to patthar bhi nahi hai

kyo chaand ko kahte hai ye shayar tira chehra
ye to tire talwo ke barabar bhi nahi hai - Kaif Bhopali
#jakhira

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