1
मजबूरी के मौसम में भी जीना पड़ता है
थोड़ा सा समझौता जानम करना पड़ता है

कभी कभी कुछ इस हद तक बढ़ जाती है लाचारी
लगता है ये जीवन जैसे बोझ हो कोई भारी
दिल कहता है रोएँ लेकिन हँसना पड़ता है

कभी कभी इतनी धुंधली हो जाती है तस्वीरें
पता नहीं चलता कदमों में कितनी हैं ज़ंजीरें
पाँव बंधे होते हैं लेकिन चलना पड़ता है

रूठ के जाने वाले बादल टूटने वाला तारा
किस को ख़बर किन लम्हों में बन जाए कौन सहारा
दुनिया जैसी भी हो रिश्ता रखना पड़ता है - ज़फर गोरखपुरी


Roman

majboori ke mausam mein bhi jeena padta hai
thoda sa samjhouta jaanam karna padta hai

kabhi-kabhi kuch is had tak badh jaati hai lachari
lagta hai jeevan jaise bojh ho koi bhari
dil kahta hai roye lekin hasna padta hai

kabhi-kabhi itni dhundhli ho jati hai tasweere
pata nahi chalta kadmo mein kitni hai zanzire
paawn bandhe hote hai laikin chalna padta hai

ruth ke jaane wale baadal tutne wala tara
kis ko khabar kin lamho mein ban jaye koun sahara
duniya jaisi bhi ho rishta rakhna padta hai - Zafar Gorakhpuri

Post a Comment Blogger

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन इंटरनेशनल अवॉर्ड जीतने वाली पहली बंगाली अभिनेत्री थीं सुचित्रा मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete

 
Top