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न अब कश्मीर रहने दे, न अब बंगाल रहने दे
हमेशा के लिए ऐ दिल मुझे भोपाल रहने दे

मुहब्बत की गरीबी से मेरा दम घुटने लगता है
तू अपने प्यार की दौलत से माला माल रहने दे

रक़ाबत में गलत रख देगा तू शतरंज के मोहरे
मै बाजी जीत जाऊंगा तू अपनी चाल रहने दे

मै तेरे शहर में सब की गुलामी कर नहीं सकता
मै गावं लौट जाऊंगा बदन पर खाल रहने दे

ज़रा सी ठेस लगने से ये बिल्कुल टूट जायेगा
जो दिल के आईने में पड़ गया है बाल रहने दे – मैकश अमरोहवी

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