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गैर ले महफ़िल में बोसे तेरे नाम के
हम रहे यु तशनालब पैगाम के

खस्तगी का तुझसे क्या शिकवा कि ये
हथकंडे है चर्खे-नीली फाम के

खत लिखेंगे, गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक है तुम्हारे नाम के

रात पी जमजम पे मय, और सुबह्दम
धोए धब्बे जामा-ए-एहराम के

दिल को आँखों ने फसाया, क्या मगर
ये भी हल्के है तुम्हारे दाम के

शाह कि है गुस्ले-सेहत कि खबर
देखिए दिन कब फिरे हमाम के

इश्क ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के

मायने
तशनालब=प्यासे होठ, खस्तगी=थकावट, चर्खे-नीली फाम=नीलगगन, जमजम=एक पवित्र ताल का पानी, जामा-ए-एहराम=पवित्र वस्त्र, हल्के=फंदा, दाम=जाल, गुस्ले-सेहत=स्वास्थ्य स्नान

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