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पत्थरों के जिस्म में भी दिल मिला
एक दिन रोता हुआ कातिल मिला

फिर उसे शैतान ठहराया गया
फिर उसे सच्चाई का हासिल मिला

वो भंवर से छूट तो आया पर
लौटकर एक डूबता हुआ साहिल मिला

कौन था जो अपनी 'मै' को छोड़ता
कौन था जो प्यार के काबिल मिला

चीख अपना दिल जब प्यार से लबरेज था
जो मिला फिर प्यार के काबिल मिला

चीख अपना दिल मसल कर रह गई
हर कोई आवाज से गाफिल मिला

लो, शराफत खुद से शरमाने लगी
कातिलों का फन न सरे महफ़िल मिला

रास्ते सब, उलझनों में फस गए
आदमी कुछ इस कदर मुश्किल मिला

ज़माने भर का दिल आया हुआ है
ये उसने दिल को समझाया हुआ है

घड़ीभर को अँधेरा खो गया है
कि सूरज गश्त पर आया हुआ है

किसी लाला के तहखाने के अंदर
किसी का आसमां गिरवी पड़ा है

गगन से यक ब यक क्यों गिर पड़ा है
जमी से रफ्ता-रफ्ता जो उठा है

जो मिलना है तो फिर झुकना पड़ेगा
जमी ने आसमां से कह दिया है

समय कि चाल के जलवे तो देखो
जमाना पीछे-पीछे दौड़ता है

कि बादल जोर पर आया हुआ है
तभी सूरज का मुह उतरा हुआ है

उसी के कंधे पे है आस सबकी
कि घुटनों के बल जो बैठा हुआ है
                                  - संजय ग्रोवर

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