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यार को मैं ने मुझे यार ने सोने न दिया
रात भर ताली-ए-बेदार ने सोने न दिया

एक शब बुलबुल-ए-बेताब के जागे न नसीब
पहलू-ए-गुल में कभी ख़ार ने सोने न दिया

रात भर कीं दिल-ए-बेताब ने बातें मुझ से
मुझ को इस इश्क़ के बीमार ने सोने न दिया
                              -ख़्वाजा हैदर अली आतिश
मायने
ताली-ए-बेदार=सौभाग्य

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  1. जितनी बार भी सुनो इसे मन नही भरता
    लाजवाब प्रस्तुति। धन्यवाद।

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