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गिला लिखू अगर मै तेरी बेवफाई का
लहू में ग़र्क सफ़ीना हो आशनाई का

दिमाग झड गया आखिर तिरा न, ऐ नमरूद
चला न पिशा से कुछ बस तिरी खुदाई का

कभी पहुच न सके दिल से ता-जुदा यक हर्फ़
अगर बयां करू तालअ की नारसाई का

दिखाऊंगा तुझे जाहिद, उस आफते-दी को
खलल दिमाग में तेरे है पारसाई का

तलब न चर्ख से कर नाने-राहत, ऐ सौदा
फिरे है आप यह कासा लिए गदाई का- मिर्ज़ा मुहम्मद रफ़ी सौदा

मायने
गिला=शिकायत, सफ़ीना=जहाज, आशनाई=जान, पहचान, पिशा=मच्छर ( खुदाई का दावा करने वाले नमरूद की नाक में एक मच्छर घुस गया था, उसी की तरफ इशारा), यक हर्फ़=एक अक्षर, तालअ=भाग्य, नारसाई=पहुच न होना, जाहिद=इबादत करने वाला, आफते-दी=बे-इन्तहा खूबसूरत नारी (धर्म परायण लोगो की परीक्षा लेने वाली ), खलल=बिगाड़, पारसाई=नेकी, तलब=मांग, चर्ख=आसमान, नाने-राहत=सुख की रोटी, कासा=भिक्षा का पात्र, गदाई=भीख मांगना

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