0
सुनो पानी में ये किसकी सदा है
कोई दरिया की तह में रो रहा है

सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा
खुदा चारो तरफ बिखरा हुआ है

पके गेहू की खुशबु चीखती है
बदन अपना सुनहरा हो चला है

हकीकत सुर्ख मछली जानती है
समुन्दर कैसा बुढा देवता है

हमारी साख का नौ खेज पत्ता
हवा के होठ अक्सर चूमता है

मुझे उन नीली आँखों ने बताया
तुम्हारा नाम पानी पर लिखा है
                             -बशीर बद्र
क्या आपने इस ब्लॉग(जखीरा) को सब्सक्राइब किया है अगर नहीं तो इसे फीड या ई-मेल के द्वारा सब्सक्राइब करना न भूले |

Post a Comment Blogger

 
Top