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जलजला आया वो दिल में वक़्त की रफ़्तार से
खुद-ब-खुद तस्वीर तेरी गिर पड़ी दीवार से

चुपके-चुपके खिचता हू कांटो का हिसार
मै की अब डरने लगा हू फुल की महकार से

हम बला-नोशो ने जहरे-आगही भी पी लिया
चलते-चलते हम भी ठोकर खा गये कोहसार से

हम से शिकवा कर रहा था आज दामने-तीही
तोड़ लाए माहो-अंजुम, फिक्र के गुलजार से

नूर साहिब, खुल न जाए तरके उल्फत का भरम
आपकी खामोशियो से, आपके अशआर से 
                                                - नूर बिजनौरी
मायने
हिसार=घेरा, बला-नोश=बहुत पीने वाला, जहरे-आगही=ज्ञान रूपी विश, कोहसार=पर्वत श्रेणी, शिकवा=शिकायत, दामने-तीही=ख़ाली दामन, माहो-अंजुम=चाँद सितारे, फिक्र=चिंतन, गुलजार=बाग़, तर्के-उल्फत=मुहब्बत छोड़ देना
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  1. लाजवाब गज़ल। आभार। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

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