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कौन कहता है मौत आई तो मर जाऊँगा
मै तो दरिया हू, समंदर में उतर जाऊँगा

तेरा दर छोड़ के मै और किधर जाऊंगा
घर में घिर जाऊँगा, सहरा में बिखर जाऊँगा

तेरे पहलु से उठूँगा तो मुश्किल यह है
सिर्फ एक शख्स को पाऊंगा जिधर जाऊँगा

अब तो खुर्शीद को डूबे हुए सदिया गुजरी
अब उसे ढूंढने में ता-ब-सहर जाऊँगा

जिन्दगी शमा की मानिंद जलाता हू नदीम
बुझ तो जाऊंगा मगर सुबह तो कर जाऊँगा-अहमद नदीम कासमी
मायने 
सहरा=रेगिस्तान, खुर्शीद=सूरज, ता-ब-सहर=सुबह तक, मानिंद=तरह

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