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कितने मौसम सरगर्दा थे, मुझसे हाथ मिलाने में
मैंने शायद देर लगा दी, खुद से बाहर आने में

बिस्तर से करवट का रिश्ता टूट गया एक याद के साथ
ख्वाब सिरहाने से उठ बैठा तकिये को सरकाने में

आज उस फुल की खुशबु मुझमे पैहम शोर मचाती है
जिसने बेहद उज्लत बरती खिलने और मुरझाने में

जितने दुख थे, जितनी उम्मीदे, सब से बराबर काम लिया
मैंने अपने आइन्दा की एक तस्वीर बनाने में

पहले दिल को आस दिला कर बेपरवा हो जाता था
अब तो अज्म बिखर जाता हू मै खुद को बहलाने में - अज्म बहजाद
मायने
सरगर्दा=परेशां, पैहम=लगातार

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