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हर लहजा तेरे पाँव की आहट सुनाई दे
तू लाख सामने न हो, फिर भी दिखाई दे

आ इस हयाते दर्द को मिल कर गुजार दे
या इस तरह बिछड़ की जमाना दुहाई दे

तेरा ख्याल ही मुझे आया न हो कही
इक रौशनी सी आख से दिल तक दिखाई दे

मिलने की तुझसे फिर न तमन्ना करे ये दिल
इतने खुलूस से मुझे दागे जुदाई दे

देखे तो कैस लौ भी दिये की लगे है सदी
सोचे तो गुल की शाख भी जलती दिखाई दे
                                                        - सईद कैस
मायने 
लहजा=पल, हयात=जिन्दगी, खुलूस=निश्चलता, दागे-जुदाई=बिछुड़ने का दर्द, गुल=फुल
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