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झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है के नहीं |
दबा-दबा सा कही दिल में प्यार है के नहीं ||

तू अपने दिल की जवां धडकनों को गिन के बता |
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है के नहीं ||

वो पल जिस में मोहब्बत जवां होती है |
उस एक पल का तुझे इंतजार है के नहीं ||

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हू दुनिया को |
तुझे भी अपने पे ऐतबार है के नहीं || - कैफ़ी आज़मी

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  1. तुझे भी अपने पे यह ऐतबार है के नहीं

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  2. यह शेइर दहे दिल से पेश-ए-खिदमत है जनाब कैफ़ी आज़मी साहिब को!
    तुझे खुदा के बराबर हमेशा समझा है
    झुका दें सजदे में सिर को दयार है के नहीं

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