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वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ?
वो शबो-रोजो-माहो-साल कहाँ?

थी वो एक शख्स के तसव्वुर से
अब वो रानाई-ए-ख़याल कहाँ?

ऐसा आसां नहीं लहू रोना
दिल में ताक़त जिगर में हाल कहाँ?

हमसे छुटा किमारखाना-ए-इश्क
वां जो जाए गिरह में माल कहा ?

फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपाता हूँ
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ?
मायने
फ़िराक़=बिछोह, विसाल=मिलन, शबो-रोजो-माहो-साल=रात,दिन, महीने, साल, तसव्वुर=कल्पना, रानाई-ए-ख़याल=विचारो की सुन्दरता, हाल= हालत/शक्ति, किमारखाना-ए-इश्क=इश्क का जुआखाना, फ़िक्र-ए-दुनिया=संसार की चिंताए

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  1. ये ग़ज़ल मुझे दीवाने ग़ालिब में नहीं दिखी ... शायद मुझसे गलती हो गई हो देखने में ...

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  2. आपसे दीवान देखने में कोई गलती नहीं हुई है सच में इसमें यह ग़ज़ल नहीं है |

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