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अगर खिलाफ है होने दो, चाँद थोड़ी है agar khilaf hai
अगर खिलाफ है होने दो, चाँद थोड़ी है
ये सब धुआ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आयेंगे घर कई जद में
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है

मुझे खबर है के दुश्मन भी कम नहीं
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुह से जो निकले वही सदाकत है
हमारे मुह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद है कल नहीं होंगे
किरायेदार है ज़ाती, मकान थोड़ी है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिटटी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है- राहत इन्दोरी
मायने
सदाकत - सच्चाई, साहिबे मसनद- कुर्सियों पर बैठे हुए, अफसर, ज़ाती= व्यक्तिगत

Roman

agar khilaf hai hone do chaand thodi hai
ye sab dhua hai koi aasman thodi hai

leggi aag to aayenge ghar kai jad me
yaha pe sirf hamara makaan thodi hai

mujhe khar hai ke dushman bhi kam nahi
hamari tarah hatheli pe jaan thodi hai

hamare muh se jo nikle, wahi sadakat hai
hamare muh me tumhari juban thodi hai

jo aaj sahibe masnad hai kal nahi hoge
kiraydar hai zaati, makaan thodi hai

sabhi ka khun hai shamil yaha ki mitti me
kisi ke baap ka hindostaan thodi hai - Rahat Indori
#Jakhira

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