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अमीरे शहर को तलवार करने वाला हू,
मै जी हुजूरी से इंकार करने वाला हू !

कहो अंधेरो से दामन समेट ले अपना,
मै जुगनुओ को अलमदार करने वाला हू !

तुम अपने शहर के हालात जान सकते हो,
मै अपने आप को अखबार करने वाला हू !

मै चाहता था कि छूटे न साथ भाई का,
मगर वो समझा के वार करने वाला हू !

बदन का कोई हिस्सा खरीद सकते हो,
मै अपने जिस्म को बाज़ार करने वाला हू !

तुम अपनी आँखों से सुनना मेरी कहानी को,
लब-ए-खामोश से इज़हार करने वाला हू !

हमारी राह में हाएल कोई नहीं होगा,
तू एक दरिया है मै पार करने वाला हू !
                                      - मुनव्वर राणा
मायने
अलमदार=झंडा लेकर चलने वाला, हाएल=बाधा

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  1. क्या बात है !
    मुनव्वर राना को पढ़ना अपने आप में एक अनुभव है
    शुक्रिया इस कलाम को पढ़वाने के लिये

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