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में जिन्दा हु यह मुश्तहर कीजिये !
मेरे कातिलो को खबर कीजिये !!

जमी सख्त है, आसमा दूर है !
बसर हो सके तो बसर कीजिये !!

सितम के बहुत से है रद्दे अमल !
जरुरी नहीं चस्म तर कीजिये !!

वही जुल्म बारे दीगर है तो फिर !
वही जुल्म बारे दीगर कीजिये !!

कफ़स तोडना बाद की बात है !
अभी ख्वाहिसे बालो पर कीजिये !! - साहिर लुधियानवी
मायने 
मुस्तहर=प्रचारित, रद्दे अमल= प्रतिक्रिया, चस्मतर= आँखे भीगना, बारे दीगर= दूसरी बार, कफ़स=पिंजरा, ख्वाहिसे बालो पर= उड़ान की ख्वाहिश 

Roman

mai zinda hu yah mushthar kijiye
mere qatilo ko khabar kijiye

jamin sakht hai, aasmaan door hai
basar ho sake to basar kijiye

sitam ke bahut se hai radde amal
jaruri nahi chasm tar kijiye

wahi julm bare deegar hai to fir
wahi julm bare digar kijiye

kafas todna baad ki baat hai
abhi khwahishe baalo par kijiye - Sahir Ludhiyanvi

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  1. साहिर जी की बेहतरीन रचना लाने के लिए बहुत आभार
    अथाह...

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