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शब्द कहें तू न रुक भइया
कदम बढ़ाकर चल-चल-चल-चल
कविता की नदिया बहती है
करती जाए कल-कल-कल-कल
कविता की नदिया बहती है……….

काग़ज़ पर होती है खेती
हर भाषा के शब्दों की
उच्चारण हों शुद्ध यदि तो
शान बढ़े फिर अर्थों की
हिंदी-उर्दू के वृक्षों से
तोड़ रहे सब फल-फल-फल-फल
कविता की नदिया बहती है……….

अ आ इ ई के अक्षर हों
या फिर अलिफ़ बे पे ते
ए बी सी डी भी सीखेंगे
सब होनहार हैं बच्चे
उपलब्ध नेट पे आज
समस्याओं के हल-हल-हल-हल
कविता की नदिया बहती है……….

मीरो-ग़ालिब हों या फिर
हों तुलसी-सूर-कबीरा
प्रेम से उपजे हैं सारे
कहते संत “महावीरा”
बैर भूलकर आपस में
जी लो सारे पल-पल-पल-पल
कविता की नदिया बहती है……….
- महावीर उत्तरांचली

teero talwar se nahi hotaपरिचय
महावीर उत्तरांचली साहब उत्तराखंड के रहने वाले है आपका जन्म दिल्ली में २४ जुलाई १९७१ को हुआ | आप वर्तमान में गाज़ियाबाद से प्रकाशित त्रेमासिक पत्रिका कथा संसार के उप संपादक है और बुलंदशहर से प्रकाशित त्रेमासिक पत्रिका बुलंदप्रभा में साहित्य सहभागी है | साथ ही साथ आप उत्तरांचली साहित्य संस्थान के निर्देशक भी है |
आपकी अभी तक तीन किताबे प्रकाशित हो चुकी है जिनमे :-
1.) आग का दरिया (ग़ज़ल संग्रह, २००९ / अमृत प्रकाशन),
2.) तीन पीढ़ियां : तीन कथाकार (कथा संग्रह में प्रेमचंद, मोहन राकेश और महावीर उत्तरांचली की 4-4 कहानियां; संपादक : सुरंजन, २००७) मगध प्रकाशन,
3.) मन में नाचे मोर है (जनक छंद, २०१३) उत्तरांचली साहित्य संस्थान से प्रकाशित हो चुके है |
आपसे m.uttranchali@gmail.com या 8178871097 पर संपर्क कर सकते है |

Roman
shabd kahe tu n ruk bhaiya
kadam badhakar chal-chal-chal-chal
kavita ki nadiya bahti hai
karti jaye kal-kal-kal-kal
kavita ki nadiya bahti hai....

kaagaj par hoti hai khaiti
har bhasha ke shabdo ki
uchharan ho shuddh yadi to
shaan badhe fir artho ki
hindi-urdu ke vriksho se
tod rahe sab phal-phal-phal-phal
kavita ki nadiya bahti hai....

a aa i ie ke akshar ho
ya phir alif be pe te
a b c d bhi sikhenge
sab honhaar hai bachche
uplabdh net pe aaj
samsyao ke hal-hal-hal-hal
kavita ki nadiya bahti hai....

meero-ghalib ho ya phir
ho tulsi-sur-kabira
prem se upje hai saare
kahte sant "Mahaveera"
bair bhulkar aaps me
jo lo sare pal-pal-pal-pal
kavita ki nadiya bahti hai....
- Mahaveer Uttranchali

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  1. Thanks for Publish poem "KAVITA KI NADIA" on Jakhira

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  2. बहुत बहुत बधाई व साधुवाद

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    1. Thanks Pathak G.... aur kya chal rha hai aajkal.... Music Class kaisi chal rhi hain?

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