ए नौजवाने-बेअमल, मायूस क्यों है आजकल - दिलावर फिगार

ए नौजवाने-बेअमल, मायूस क्यों है आजकल

ए नौजवाने-बेअमल, मायूस क्यों है आजकल
सर्विस नहीं मिलती तुझे, सर्विस पे लानत भेज दे
एम. ए. की डिग्री फाड दे, गर्दे-नहूँसत झाड दे
सर पर अंगोछा डाल ले, बन्दर के बच्चे पाल ले
बाजार में मजमा लगा, करतब दिखा पैसा कमा
यह भी नहीं मंजूर अगर
जीने की ये तदबीर कर


अपना क्लिनिक खोल कर, बन जा अताई डाक्टर
पानी के इंजेक्शन लगा, पानी बहा चांदी बना
जब सांस पर कुछ जोर हो, लिख दे मरज़ है हौंग-हो
जब पेट में हो कुछ चमक, लिख दे बिलाडी बास्टक
आला लगाकर कौन से, खेल अहमको
बेमौत मर जाने की फीस, हो कम से कम दस बल्कि बीस
बीमार अगर मर जायेगा, बटुवा तीरा भर जायेगा
यह भी नहीं मंजूर अगर
जीने की ये तदबीर कर


राह-ए-शराफत छोड़ दे, अख़लाक़ का बूत तोड़ दे
मुछे हो कुछ ऐसी की बस, मुह पर बजे दस बज के दस
हर नातवा को ठोक दे, आँखों में मिर्चें झोक दे
तुझसे डरेगा ये जहा, इज्जत करेगा ये जहा
अब रंगे-दुनिया और है, इस वक्त तेरा दौर है
यह भी नहीं मंजूर अगर
जीने की ये तदबीर कर


हो जा इलेक्शन में खडा, बन जा सियासी रहनुमा
कौमी नुमाइंदा है तू, तकदीर आइन्दा है तू
नारा लगाना सीख ले, उल्लू बनाना सीख ले
मुगदर घुमाना सीख ले, लाठी चलाना सीख ले
परदे की भी क्यों ओट ले, जूता दिखाकर वोट ले
पब्लिक को अपने साथ ले, इस हाथ दे उस हाथ ले
रिश्वत का कारोबार कर, पब्लिक का बेडा पार कर
यह भी नहीं मंजूर अगर
जीने की ये तदबीर कर


फुटपाथ पर हो जा खड़ा, जैसे कोई चिकना घड़ा
आँखों पे पट्टी बाँध ले, पैरों में रस्सी बाँध ले
हर शख्स से यु अर्ज कर, बाबा खुदा के नाम पर
थोडा सा दीवाना हूँ मै, अंधा नहीं काना हूँ मै
घर है न कोई दर मिरा, फुटपाथ है बिस्तर मिरा
तकदीर का मारा हूँ मै, नाअहलो-नाकारा हूँ मै
मै कुदरती मुहताज हूँ, कल क्या था और क्या आज हूँ
ये भी नहीं मुमकिन अगर, जा ऑ यु ही फांके से मर
इस शहर में सर्विस कहा
क्या बात करते हो मिया


- दिलावर फिगार

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