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आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा
किश्ती के मुसाफिर ने समुन्दर नहीं देखा

बेवक्त अगर जाऊँगा सब चौक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा

जिस दिन से चला हू मेरी मंजिल पर नजर है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

यह फूल मुझे कोई विरासत में मिले है
तुम ने कांटो भरा बिस्तर नहीं देखा

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मै मोम हू, उसने मुझे छुकर नहीं देखा
                                           - बशीर बद्र
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  1. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
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