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तंग आ चुके हैं कशमकश ज़िन्दगी से हम
ठुकरा न दें जहां को कहीं बेदिली से हम

लो, आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद
लो, अब कभी गिला न करेंगे, किसी से हम

उभरेंगे एक बार अभी दिल के बलबले
गो दब गए हैं बारे-गमे-ज़िन्दगी से हम

गर ज़िन्दगी में मिल गए हम इत्तिफाक से
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम

अल्लाह रे! फरेबे मशीयत कि आज तक
दुनिया के जुल्म सहते रहे खामोशी से हम - साहिर लुधियानवी

मायने
कशमकश = संघर्ष, बारे-गमे-ज़िन्दगी से = जीवन के दुखों के बोझ से , फरेबे मशीयत = सांसारिक छल कपट

Roman

tang aa chuke hai kshmkash zindgi se ham
thukra n de jaha ko kisi bedili se ham

lo, aaj hamne tod diya rishta-ummid
lo, ab kabhi gila n karenge, kisi se ham

ubhrenge ek baar abhi dil ke balbale
go dab gaye hai baare game-zindgi se ham

gar zindgi me mil gaye ham ittifaq se
puchenge apna haal teri bebsi se ham

allah re! farebe mashiyat ki aaj tak
duniya ke julm sahte rahe khamoshi se ham - Sahir Ludhiyanvi
#jakhira

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