0

जीवन क्या है चलता फिरता एक खिलौना है,
दो आँखों में एक से हँसना, एक से रोना है |
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं 
आज (8 फरवरी 2016 [08/02/2016] ) अपने ही शेरो को सच्चाई में तब्दील करते हुए शायर निदा फ़ाज़ली साहब हमें विदा कह गए । उनका हर शेर हमारे दिल में उतरता है । उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि

यूँ तो गुज़र रहा है हर एक पल खुशी के साथ
फिर भी कोई कमी सी है, क्यू ज़िंदगी के साथ

रिश्ते, वफायें, दोस्ती, सब कुछ तो पास है
क्या बात है पता नही, दिल क्यू उदास है
हर लम्हा है हसीन, नयी दिलकशी के साथ

चाहत भी है सुकून भी है दिलबरी भी है
आँखों में ख़्वाब भी है, लबोंपर हसी भी है
दिल को नही है कोई शिकायत किसी के साथ

सोचा था जैसा वैसा ही जीवन तो है मगर
अब और किस तलाश में बैचैन है नज़र
कुदरत तो मेहरबान है दरयादिली के साथ - निदा फ़ाज़ली

Roman

yu to gujar rahaa hai har ek pal khushi ke saath
fir bhi koi kami si hai, kyu jindagi ke saath

rishte, wafaayen, dosti, sab kuchh to paas hai
kyaa baat hai pataa nahi, dil kyu udaas hai
har lamhaa hai hasin, nayi dilakashi ke saath

chaahat bhi hai sukun bhi hai dilabari bhi hai
aankhon men khwaab bhi hai, labo par hasi bhi hai
dil ko nahi hai koi shikaayat kisi ke saath

sochaa thaa jaisaa waisaa hi jivan to hai magar
ab aur kis talaash men baichain hai nazar
kudarat to meharabaan hai darayaadili ke saath - Nida Fazli
#jakhira

Post a Comment Blogger

 
Top