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हसरत है कि तुझे सामने बैठे कभी देखूं
मैं तुझ से मुखातिब हूँ, तेरा हाल भी पूछूं

दिल में है मुलाकात की ख्वाहिश की दबी आग
मेहंदी लगे हाथों को छुपा कर कहाँ रखूँ

जिस नाम से तूने मुझे बचपन से पुकारा
इक उम्र गुजरने पे भी वो नाम ना भूलूँ

तू अश्क ही बन के मेरी आँखों में समा जा
मैं आइना देखूं तो तेरा अक्स भी देखूं

पूछूं कभी गुंचों से सितारों से हवा से
तुझ से ही मगर आ के तेरा नाम ना पूछूं

ऐ मेरा तमन्ना के सितारे तू कहाँ है
तू आये तो ये जिस्म शब्-ए-गम को न सौंपूं - किश्वर नाहिद

Roman

hasrat hai ki tujhe samne baithe kabhi dekhu
mai tujhse mukhtib hu, tera haal bhi puchu

dil me hai mulakat ki khawahish ki dabi aag
mehandi lege haatho ko chhupa kar kahaa rakhu

jis naam se tune mujhe bachpan se pukaara
ik umra gujrane pe bhi wo naam n bhulu

tu ashq hi ban ke meri aankho me sama ja
mai aaina dekhu to tera aks bhi dekhu

puchu kabhi guncho se, sitaro se, hawa se
tujh se ho magar aa ke tera naam na puchu

ae mera tamnna ke sitare tu kahaa hai
tu aaye to ye jism shab-e-gam ko n sopu - Kishwar Naheed
#jakhira

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  1. जिस नाम से तूने मुझे बचपन से पुकारा
    इक उम्र गुजरने पे भी वो नाम ना भूलूँ

    तू अश्क ही बन के मेरी आँखों में समा जा
    मैं आइना देखूं तो तेरा अक्स भी देखूं
    बहुत ही बढ़िया

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  2. ​बहुत ही बढ़िया ​!
    ​समय निकालकर मेरे ब्लॉग http://puraneebastee.blogspot.in/p/kavita-hindi-poem.html पर भी आना ​

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